अच्छा एक काम करना अपने बाबूजी से
पूछ के आना की ये एक्टरों की दुनियाँ खोखली क्यूँ है ?

हेल्लो दोस्तों, कैसे हो ?
हाँ यार ठीक हूँ, पर तूने वो पता किया जो पूछने को कहा था हमने ?
क्या बोला उन्होंने, हमें भी बता .... बता ना यार
बताता हूँ, बोले देखो बेटा,
काम कोई भी बुरा नहीं होता, पर काम वो करो जिसमे अपने घर की
इज्ज़त ! मतलब माँ-बहन की इज्ज़त बनी रहे ।
सिर्फ पैसे के लिए अपनी ज़मीर को नहीं बेचना चाहिए ।
पैसे से आप मन की शांति और सुकून नहीं पा सकते हो !
अगर शांति और सुकून पाना है तो अपने अन्दर इंसानियत जगाना पड़ेगा ।
अपना काम के साथ जो असहाय और जरूरतमंद हैं उनके काम आना होगा,
बड़ों का आदर के साथ अपने परिवार के साथ खुश रहकर उनका आशीर्वाद पाना होगा ।
और उन्होंने पूछा,
अच्छा एक बात बताओ क्या ये सब तुम पैसे से ख़रीद सकते हो ?
इसपर मैंने कहा,
पर बाबूजी ज़िन्दगी सही से जीने के लिए रुपया तो चाहिए ना !
बिल्कुल सही पर बेटा, पैसे में सबसे ज्यादा नशा होता है..
एक बार इंसान इसके पीछे भागना चालू करता है फिर ज़िन्दगी भर
इसके ही पीछे भागता रहता है । कभी फिर उसका पेट नहीं भरता....
तो काम वो करो, जिसमे तुम्हारा परिवार भी खुश रहे,
तुम शांति और सुकून की भी ज़िन्दगी जियो ।
तुम कहीं भी आराम से आ जा सको, घूम सको,
फ्री होके अपनी ज़िन्दगी जी सको, तुम्हारी ज़िन्दगी पे तुम्हारा अधिकार हो ।
क्या तुम्हें लगता है, कि ये फिल्म वाले ये सब कर पाते हैं ?
या ये शांति और सुकून उनके पास है ?
तो मेरे बाबूजी का ये ख्याल और ये कहना था ।
तुम सब क्या कहते हो ?
और हाँ कल तुम सबने भी जो सोचा है,
अपने अपने बाबूजी से पूछ के आना.....
(क्रमश:)
......................अभिषेक कुमार झा ''अभी''.
पूछ के आना की ये एक्टरों की दुनियाँ खोखली क्यूँ है ?

हेल्लो दोस्तों, कैसे हो ?
हाँ यार ठीक हूँ, पर तूने वो पता किया जो पूछने को कहा था हमने ?
क्या बोला उन्होंने, हमें भी बता .... बता ना यार
बताता हूँ, बोले देखो बेटा,
काम कोई भी बुरा नहीं होता, पर काम वो करो जिसमे अपने घर की
इज्ज़त ! मतलब माँ-बहन की इज्ज़त बनी रहे ।
सिर्फ पैसे के लिए अपनी ज़मीर को नहीं बेचना चाहिए ।
पैसे से आप मन की शांति और सुकून नहीं पा सकते हो !
अगर शांति और सुकून पाना है तो अपने अन्दर इंसानियत जगाना पड़ेगा ।
अपना काम के साथ जो असहाय और जरूरतमंद हैं उनके काम आना होगा,
बड़ों का आदर के साथ अपने परिवार के साथ खुश रहकर उनका आशीर्वाद पाना होगा ।
और उन्होंने पूछा,
अच्छा एक बात बताओ क्या ये सब तुम पैसे से ख़रीद सकते हो ?
इसपर मैंने कहा,
पर बाबूजी ज़िन्दगी सही से जीने के लिए रुपया तो चाहिए ना !
बिल्कुल सही पर बेटा, पैसे में सबसे ज्यादा नशा होता है..
एक बार इंसान इसके पीछे भागना चालू करता है फिर ज़िन्दगी भर
इसके ही पीछे भागता रहता है । कभी फिर उसका पेट नहीं भरता....
तो काम वो करो, जिसमे तुम्हारा परिवार भी खुश रहे,
तुम शांति और सुकून की भी ज़िन्दगी जियो ।
तुम कहीं भी आराम से आ जा सको, घूम सको,
फ्री होके अपनी ज़िन्दगी जी सको, तुम्हारी ज़िन्दगी पे तुम्हारा अधिकार हो ।
क्या तुम्हें लगता है, कि ये फिल्म वाले ये सब कर पाते हैं ?
या ये शांति और सुकून उनके पास है ?
तो मेरे बाबूजी का ये ख्याल और ये कहना था ।
तुम सब क्या कहते हो ?
और हाँ कल तुम सबने भी जो सोचा है,
अपने अपने बाबूजी से पूछ के आना.....
(क्रमश:)
......................अभिषेक कुमार झा ''अभी''.
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