Saturday, 16 March 2013

''मन की छोटी-छोटी बातें'' --पहली कड़ी

मैं बड़ा कब होऊँगा ?
बड़ा होकर मैं डॉक्टर बनूँगा,
नहीं मैं इंजिनियर बनूँगा, मैं वकील बनूँगा,
अरे नहीं मैं बड़ा होकर देश की रक्षा करूंगा,
सीमा का सिपाही बनूँगा ।
पर मैं जब बाबूजी को ''नेता या पुलिस'' बनाने की बात कहता हूँ,
तो बाबूजी भड़क क्यूँ जाते हैं ?

ख़ैर, हम तो अभी बच्चे हैं यार,
बड़े तो हो जाएँ पहले ।
हाँ हाँ ठीक है पर मैं बड़ा होकर सिर्फ फिल्मों में काम करूँगा ।

क्यूँ रे तू माधुरी दीक्षित को पसंद करता है क्या ?

चल बे पगला गया है क्या ?
यार उनकी ऐश होती है, क्या स्टाइल होता है,और सबसे बड़ी बात की
इनके पीछे लड़कियों की लम्बी लाइन होती है…

हा हा हा हा हा

पर एक बात बता यार मेरे बाबूजी तो कह रहे थे की इन सबकी लाइफ में
बड़े पंगे होते हैं ।
ये भी कह रहे थे की बेटा ये बाहर से जितना रंग-बिरंगी लगती है ना,
अन्दर से उतनी ही खोखली दुनिया है ।
पर यार ये खोखली क्यूँ है ये नहीं बताते ?
(क्रमश:)
..........अभिषेक कुमार झा ''अभी''.
 

2 comments:

  1. बहुत ही अच्छा ,सुंदर और उत्तम प्रयास है आपका ,
    सरल भाषा में व्यक्त किये गए आपके विचार बहुत कुछ कह जाते है ,
    मन को हलके से छू भी जाते है ...
    पढ़के बहुत अच्छा लगा !!
    Keep It Up.

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    1. Saadar Aabhar Meenu Ji..
      Bahut Bahut Utsahit Huaa,
      Jaldi Hi Agali Kadi-Dar-Kadi Aap Sabke Samne Rakhunga.
      Bahut Bahut Dhanywaad

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