Sunday, 17 March 2013

''मन की छोटी-छोटी बातें''- दूसरी कड़ी

अच्छा एक काम करना अपने बाबूजी से
पूछ के आना की ये एक्टरों की दुनियाँ खोखली क्यूँ है ?


हेल्लो दोस्तों, कैसे हो ?

हाँ यार ठीक हूँ, पर तूने वो पता किया जो पूछने को कहा था हमने ?
क्या बोला उन्होंने, हमें भी बता .... बता ना यार

बताता हूँ, बोले देखो बेटा,
काम कोई भी बुरा नहीं होता, पर काम वो करो जिसमे अपने घर की
इज्ज़त ! मतलब माँ-बहन की इज्ज़त बनी रहे ।
सिर्फ पैसे के लिए अपनी ज़मीर को नहीं बेचना चाहिए ।
पैसे से आप मन की शांति और सुकून नहीं पा सकते हो !
अगर शांति और सुकून पाना है तो अपने अन्दर इंसानियत जगाना पड़ेगा ।
अपना काम के साथ जो असहाय और जरूरतमंद हैं उनके काम आना होगा,
बड़ों का आदर के साथ अपने परिवार के साथ खुश रहकर उनका आशीर्वाद पाना होगा ।
और उन्होंने पूछा,
अच्छा एक बात बताओ क्या ये सब तुम पैसे से ख़रीद सकते हो ?

इसपर मैंने कहा,
पर बाबूजी ज़िन्दगी सही से जीने के लिए रुपया तो चाहिए ना !

बिल्कुल सही पर बेटा, पैसे में सबसे ज्यादा नशा होता है..
एक बार इंसान इसके पीछे भागना चालू करता है फिर ज़िन्दगी भर
इसके ही पीछे भागता रहता है । कभी फिर उसका पेट नहीं भरता....

तो काम वो करो, जिसमे तुम्हारा परिवार भी खुश रहे,
तुम शांति और सुकून की भी ज़िन्दगी जियो ।
तुम कहीं भी आराम से आ जा सको, घूम सको,
फ्री होके अपनी ज़िन्दगी जी सको, तुम्हारी ज़िन्दगी पे तुम्हारा अधिकार हो ।
क्या तुम्हें लगता है, कि ये फिल्म वाले ये सब कर पाते हैं ?
या ये शांति और सुकून उनके पास है ?

तो मेरे बाबूजी का ये ख्याल और ये कहना था ।
तुम सब क्या कहते हो ?

और हाँ कल तुम सबने भी जो सोचा है,
अपने अपने बाबूजी से पूछ के आना.....
(क्रमश:)
......................अभिषेक कुमार झा ''अभी''.

Saturday, 16 March 2013

''मन की छोटी-छोटी बातें'' --पहली कड़ी

मैं बड़ा कब होऊँगा ?
बड़ा होकर मैं डॉक्टर बनूँगा,
नहीं मैं इंजिनियर बनूँगा, मैं वकील बनूँगा,
अरे नहीं मैं बड़ा होकर देश की रक्षा करूंगा,
सीमा का सिपाही बनूँगा ।
पर मैं जब बाबूजी को ''नेता या पुलिस'' बनाने की बात कहता हूँ,
तो बाबूजी भड़क क्यूँ जाते हैं ?

ख़ैर, हम तो अभी बच्चे हैं यार,
बड़े तो हो जाएँ पहले ।
हाँ हाँ ठीक है पर मैं बड़ा होकर सिर्फ फिल्मों में काम करूँगा ।

क्यूँ रे तू माधुरी दीक्षित को पसंद करता है क्या ?

चल बे पगला गया है क्या ?
यार उनकी ऐश होती है, क्या स्टाइल होता है,और सबसे बड़ी बात की
इनके पीछे लड़कियों की लम्बी लाइन होती है…

हा हा हा हा हा

पर एक बात बता यार मेरे बाबूजी तो कह रहे थे की इन सबकी लाइफ में
बड़े पंगे होते हैं ।
ये भी कह रहे थे की बेटा ये बाहर से जितना रंग-बिरंगी लगती है ना,
अन्दर से उतनी ही खोखली दुनिया है ।
पर यार ये खोखली क्यूँ है ये नहीं बताते ?
(क्रमश:)
..........अभिषेक कुमार झा ''अभी''.